लग जा गले... के फिर ये हसीन रात हो न हो...
शायद फिर इस जानम में मुलाक़ात हो ना हो...
लग जा गले...
देखा जो इक नज़र हमें... धड़कन मचल गयी...
तुम जो मिले तो हमसफ़र... दुनिया मचल गयी...
अपनी वफ़ा का फिर कोई अंजाम हो न हो...
शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो...
लग जा गले...
तुमसे जो दिल लगाया तो... की है क्या खता...
पहली दफ़ा ही दिल्लगी... क्यूँ बन गयी सज़ा...
इस दिल में फिर से प्यार का एहसास हो न हो...
शायद फिर इस जनम में... मुलाक़ात हो न हो...
लग जा गले...