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Wednesday, December 22, 2010

पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

पत्ता-पत्ता.. बूटा-बूटा.. हाल हमारा जाने है
जाने न जाने.. गुल ही न जाने.. बाग़ तो सारा जाने है

1.) बस कुछ दिन ही मिले थे… मिलके फ़िर हम हो गये जुदा
क्या हाल है जिया का… हम-तुम ही जाने या अपना ख़ुदा
फूलों से उनकी महेक को, परिंदों से उनकी चहेक को
कौन जुदा कर पाए है…
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

2.) लो पोंछ लेते हैं आँसू… अब सिर्फ़ मुस्कुराएँगे हम
जो भी मिले जीवन में… शिकवा कभी ना जताएंगे हम
बस तुम साथ में रहना, जैसे गले में हो गहना
और ये दिल क्या चाहे है…
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

3.) तुमसे जो दिल लगाया, फिर क्यों नये रिश्ते की ओर चला
समझाऊं कैसे इस दिल को, आख़िर ये मैं क्या करने चला
कैसी है मजबूरी, मिलके भी क्यूँ है दूरी
उलझन सुलझ ना पाए है…
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

4.) दोनो ही श्याम दीवानी, चाहे मीरा हो या राधा
श्याम कैसे बाँटे, अपने प्रेम को आधा-आधा
राधा रास रचाए, मीरा जोगन बन जाए
श्याम किसे मिल पाए है…
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

5.) याद अगर हो तुमको, खाए जो क़समें पहाड़ों पे हम
निकल आए इतनी दूर, कि वापस जाना है मुश्क़िल सनम
जो हो देख लेंगे, दुनिया से छिप कर मिलेंगे
उल्फ़त के ये अफ़साने है…
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

6.) मझधार में है नैय्या, कोई तो पार लगा दे इसे
कोई तो होगा ऐसा, ये दिल अपना माने जिसे
कहीं वो तू तो नहीं है, हां-हां तू है तू ही है
तूही नज़र में समाए है…
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

7.) होगी नयी सुबह भी, इस इंतेज़ार में बैठे हैं हम
मिलजुल कर हम रहेंगे, कोसों दूर हो जाएँगे ग़म
तमन्ना यही है हमारी, दुआएँ यही है हमारी
फ़िर क्यों ये दिल घबराए है…
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

8.) तूने ही तो कहा था, मरना हमें गेवारा नहीं
हमको तो ज़िंदा रहकर, करनी है दुनिया में रौशनी
कितनी सच्ची कही थी, कितनी अच्छी कही थी
दिल को बहुत ही भाए है…
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

9.) तुमने बहुत कुछ कह डाला, बातों को मन में बसाएँगे हम
माना न पा सके तुम्हें, हँसके ये दूरी निभाएँगे हम
राहों में दीप जलाए, अँखियों में आस जगाए
आँसू ही जीवन बन जाए है…
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

10.) उड़ने लगे है गगन में, जाना है हमको सितारों के पार
होगी जहाँ में खुशियाँ, हंसते रहेंगे हम बार-बार
कैसा है सच का सवेरा, सपनों का है ये बसेरा
सोच के दिल लहराए है…
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

11.) सोचा था अब बस करूँगा, ये देखो एक और लिखने लगा
कुच्छ तो है इस नगमे में, रह-रह के ये प्यास जगने लगा
मेरी ओर से एक और सही ये, तेरे लिए हितो कही है
लिखना या क्या रास आए है...
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

12.) इंतेहाँ की घड़ी है, डर मत ख़ुदा है तेरा
ख़ुद पर तू रख भरोसा, तेरे क़रीब है मंज़िल तेरा
तेरे संग मेरी दुआएँ, तेरे संग मेरी वफ़ाएँ
मंज़िल तेरे क़दम चूम जाए है...
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

13.) जो भी हैं बेसहारे, उनका सहारा बन जाओ तुम
थोड़ा प्यार ज़िंदगी का, इनसे भी अब बाँटो तुम
ये भी हैं अल्लाह के बच्चे, दिल के बड़े हैं सच्चे
हक़ है इन्हें के मुस्कुराए हैं...
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

14.) आज तू ज़िंदगी में, रखेगा एक नया क़दम
मुझको है यक़ीन के, बख़ूबी निभाएगा रीत सनम
फिर भी जीवन की डगर में, जब-जब तू घबराए
साथ हमें तू पाए है...
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

15.) आज हमारे मिलन को, एक महीना है गुज़रा
लम्हा-लम्हा यूँ गुज़रा, न गुज़रे कभी ये सफ़र अपना
जिस्म जुदा होकर भी, रूहें जुदा न हुई हैं
जन्मों से साथ निभाए हैं...
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

16.) महफ़िल सजी है घर में, गूँज उठी शहनाईयाँ
भीड़ में दिल अकेला, डंस्ती हैं मुझको तनहाईयाँ
रनगीनियाँ भी जैसे, जगमग घर भी जैसे
तेरे बग़ैर बेमाने है...
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

17.) श्याम ने बंसी बजाई, प्रेम का संगीत छेड़ दिया
राधा भी जमुना तट आई, श्याम से अँखियों का मेल किया
पर एक मीरा बेचारी, हरि दरस की मारी
काहे तरस रह जाए है...
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

18.) मुझको भी ये यक़ीन है, मिलजुल के हम रहेंगे सदा
चाहे बदले ये मौसम, प्यार हमारा रहेगा जवां
और कुछ दिनों की जुदाई, जाने सारी ख़ुदाई
कितना तुझे दिल चाहे है...
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

19.) आख़िर वो रात है आई, सजने लगी है फूलों के सेज
निभानी है रीत जगत की, यादों को तेरी रख कर सहेज
सिंदूरी शाम है आई, मौसम ने ली अंगड़ाई
तेरी कमी बस सताए है...
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

20.) सागर क़रीब था कितना, फिर भी दिल में इक प्यास थी
दूर होकर ही तुमसे, दिल में मिलन की इक आस थी
दिल से यादों की ल़हेरें, टकराती हैं तरंगें
तूफ़ान सा दिल में उठाए है...
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

21.) दूरी गर न होती, चाहत का मतलब समझता ही कौन
प्यार न यूँ गहराता, गर ये तड़प न बढ़ती हर शाम
अब जूस्तजू में तुम्हारी, अब आरज़ू में तुम्हारी
कुछ दिन ही तन्हा बिताने हैं...
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

22.) तेरी ज़रा सी आहत को, तरस के रह जाता है दिल
दिल को मैं कैसे समझाऊं, जानूँ मैं क्या है तेरी मुश्क़िल
संघून तेरी मजबूरी, सात दिनों की ये दूरी
सात बरस बन जाए है...
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

23.) जुदाई के दिन हुए पूरे, लो फिर से मिलने की रुत आ गयी
मौसम ने यूँ रुख़ बदला, तन-मन में जैसे बहार आ गयी
कोयल कहीं गुनगुनाए, पायल कहीं चनछनाए
दिल की लगी को बढ़ाए है...
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

24.) आँखें जो मीच लूँ तो, चेहरा नज़र तेरा आए मुझे
बाहें जो खींच लूँ तो, दिल और क़रीब ले जाए मुझे
मन में उतरता जाए, रूह में बस्ता जाए
प्यार तो और गहराए है...
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

25.) ये वादियाँ ये घटायें, गाएँगी अपनी रवानियाँ
नगमें हमारे मिलन की, दोहराएँगी जवानियाँ
कल हम रहें न रहें, चाहे जिए या मरें
रहेंगी ये अपनी निशानियाँ...
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

26.) तूने मुझको छूकर, मूरत में फूँकी है जान सनम
लाया बहार चमन में, वरना ज़िंदगानी थी रूखी सनम
दिल तेरे दर पे सवाली, तू ही इस बगिया का माली
तेरे ज़िक्र पे हम खिल जाए हैं...
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

27.) मुझको तो प्यारी लगे है, तेरी हँसी और ठिठोलियाँ
मन मोह लेती हैं मेरा, तेरी नटखट अटखेलियाँ
मन ही मन मुस्काउं, जब तुझे सोच में लाऊं
प्रीत तेरी रंग लाए है...
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

28.) कोई मुझे मिला दे, मेरे दिल के चितचोर से
वो मस्त पवन के जैसा, बैरी आया किस ओर से
और देखो क्या कर गया वो, चैन-ओ-क़रार ले गया वो
आहें भर-भर हम रह जाए हैं...
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

29.) दिल की कलम से तुमने, कोरे काग़ज़ पे लिख डाला सनम
चाहे न चाहे ज़माना, प्यार हमारा रहेगा अमर
प्यार इतना किया है, मीठा सा दर्द दिया है सनम
ये अश्क़ न रुक पाए हैं...
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

30.) अब तेरे सपनों में, पतंग सा उड़ रहा है मन
दिल में ये बेचैनी, दिलबर है तेरे कारन
ये फ़ासले ये दूरी, होने चली है पूरी
वक़्त न कहीं थम जाए है...
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…

31.) तेरे लौट आने से, आई है दिल में कैसी बहार
शब से हुआ है सवेरा, दिल को मिला है चैन-ओ-क़रार
ये लो क़सम ख़ाते हैं, जो नगमें सजाए हैं हमने
उनको अंजाम पे लाते हैं...
पत्ता-पत्ता… बूटा-बूटा… हाल हमारा जाने है…
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